Kaam Ras, Blog of Kaam Dev

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Hi I am Kaam Dev and Hindi meaning of my name is the Lord of Love Making. I am a sincere student of art of love making. I believe that performing sex is divine, it is one of the best blessings of the GOD, it leads to ultimate goal of human life, 'MOKSHA'. Studying & experimenting with new positions of lave making is my only passion. Cheers Kaam Dev

Saturday, November 24, 2007

रैल यात्रा : एक कहानी

रैल यात्रा : एक कहानी

मेरा नाम मानिक कपूर है । मैं पैशे से एक फ़ोटोग्राफ़र हूँ । मुम्बई में रहता हूँ । मेरा अकसर शूटिंग के लिये बाहर जाना होता रहता है । ऐसे ही एक शूटिंग के लिये मैं एक बार गोवा गया था । मेरे लिये यह एक बहुत ही मजेदार अनुभव था । अपनी शूटिंग के बाद कुछ दिन के लिये मैं अकेला गोवा में रूक गया था । मैंने ट्रैन से आने का फ़ैसला किया । मैंने ए सी क्मपार्टमेंट में अपने लिये एक सीट रिजर्व कराया । यह गोवा का ओफ़ सीजन था इसलिये ट्रैन में बिलकुल भी भीड़ नहीं थी । मुझे बहुत आसानी से ट्रैन का टिकट मिल गया । शाम को 6 बजे मेरी ट्रैन मडगाँव स्टेशन से छूटी । मेरे क्मपार्टमेंट में मुझे सिर्फ़ दो लोग दिखे लेकिन उनकी भी सीट डिब्बे के दूसरे कोने में थी । ट्रैन वहाँ से चली और कुछ देर में ही कोई स्टेशन आया । जहाँ पर एक लड़की जो कि बहुत ही मोर्डन कपड़ो में थी मेरे क्मपार्टमेंट में आयी और मेरे भाग्य से उसकी सीट मेरे सीट की बगल में थी । उसने मेरे केबिन में प्रवेश किया । वह मुस्करायी और उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया ।

हाय, मैं आलीन ।

मैं भी मुस्कराया मन ही मन मुझे खुशी हो रही थी चलो अब मेरा रास्ता कम बोरिंग होगा । हम दोनों का वार्तालाप शुरू हुआ । वह काफ़ी बोल्ड किस्म की लड़की थी । उसका सेक्सी फ़िगर मुझे उसकी तरफ़ लगातार आकर्षित कर रहा था । बातों बातों में हम एक दूसरे के बारे में काफ़ी कुछ जान गये थे । वह मोडलिंग के लिये मुम्बई आ रही थी । इसके पहले उसने एक दो विज्ञापन में काम किया था । मेरे बारे में जानने के बाद उसने मेरे में ज्यादा इंटरेस्ट लिया । मेरे केबिन की हलकी नीली लाइट ओन थी। उसने केबिन का पर्दा खिंचा जिससे हमें बाहर से कोई अवरोध न मिले । वह मेरे सीट पर बैठी थी हम दोनों कोफ़ी पी रहे थे । हम दोनों की बातें और आगे बढ़ी और फिर फ़िल्म इण्डस्ट्री और उसके आकर्षक लाइफ़ के बारे में होने लगी । रात काफ़ी हो चुकी थी। हमारे डिब्बे में जो भी दो चार लोग थे अपने केबिन में सो चुके थे । क्योंकि कहीं से कोई आवाज नहीं आ रही थी । हम दोनों अभी भी अपनी बातों में मशगूल थे । वह मेरे से काफ़ी सटकर बैठी थी जिससे हम ट्रैन के झटकों से कभी कभी हलके से छू जाते थे । अचानक मैंने उसके हाथ को अपने हाथ पर पाया। मैंने उसकी तरफ़ देखा वह मुस्करायी बस मुझे हरी झण्डी मिल गयी ।

मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और चूम लिया । उसके कंधों पर अपना हाथ रखकर उसे अपनी और खींच लिया । वह आसानी से मेरे ऊपर आ गिरी । मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिये । उसके होंठ बहुत ही मुलायम और गुदाज थे । उसकी सांसे काफ़ी गर्म थी । मैं उसके निचले होंठों को अपने दोनों होंठो के बीच रखकर उन्हे चूसने लगा । उसके हाथो की उंगलियों मेरे बालों में उलझी हुई थी । उसने मेरी जीभ को अपने मूँह में लिया और बहुत ही मजेदार ढंग से चूस रही थी । मेरा प्राइवेट अंग पैंट के भीतर उफ़ान मार रहा था ।

मेरा हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुये उसकी कमर के नीचे तक पहूँच गया । मैंने अपना हाथ उसकी टाइट टी-शर्ट में डाल दिया । धींमे धींमे मेरा हाथ उसकी दोनों गोलाइयों के नजदीक तक पहूँच गया । मेरे हाथ उसकी ब्रा को महसूस करने लगे । मैं उसकी दोनों गोलाइयों को अपने हाथो में लेने की कोशिश कर रहा था लेकिन वे इतनी बड़ी थी कि मेरे हाथो में नहीं आ रही थी । इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना जारी रखा । उसकी हरकते मुझे बहुत ही ज्यादा उत्साहित कर रही थी ।

अचानक मैंने महसूस किया कि उसका हाथ मेरी पैंट पर पड़ा था । मेरा प्राइवेट अंग मेरे पैंट को फ़ाड़कर बाहर आने को तैयार था । वह मेरे सख्त हो चुके अंग को मेरे पैंट के ऊपर से रगड़ रही थी । उसने मेरी पैंट की जिप खोल दी और अपना हाथ मेरे पैंट के अन्दर डाल दिया और मेरे लण्ड को अण्डर वीअर के ऊपर से पकड़ लिया । मेरी हालत बहुत बुरी हो रही थी । उसने मेरी पैंट खोल दी और अण्डर वीअर को नीचे की तरफ़ सरकाकर मेरे जनानाँग को पकड़ लिया । मैं अपनी सीट पर ही बैठा था। वह अपनी जगह से उठी और मेरे लण्ड को उसने अपने मूँह में ले लिया । वह बहुत होट थी उसका यह सब करना मुझे और उत्तेजित कर रहा था । मुझे लगा कि अगर मैंने उसे अपने लण्ड से और खेलने दिया तो मेरा वीर्य बाहर आ जायेगा ।

मैंने उसे उठाया और अपनी सीट पर वापस बैठाया। मैंने उसके टी-शर्ट को ऊपर करके उसकी ब्रा का हुक खोल दिया । उसकी दोनों बड़ी बड़ी खूबसूरत गोलाइयों मेरे समाने बिलकुल फ़्री होकर झूलने लगी । उसकी गोलाइयों एकदम टाइट थी। मैं उन्हे अपने हाथ में लेकर दबाने लगा । उसके चेहरा पर मैं बैचेनी का आलम देख रहा था । मैंने उसके एक निप्पल को अपनी उंगलियों में लेकर उसे धींमे से मसाला । उसके मूँह से एक आआआह्ह्ह्ह्ह की ध्वनी निकाल गयी । मैं झुककर उसके दूसरे निप्पल को अपने मूँह में ले लिया और उसे अपनी जीभ से सहलाने लगा । मुझे ऐसा लग रहा था कि उसके बूब्स अब और बड़े हो गये थे ।

अब मेरे हाथ उसके जांघों से होते हुई उसके गुप्ताँग पर पहूँच गये। उसने शर्ट पैंट पहन रखा था । मैंने कैसे भी उन्हे खोला और उसके पैंटी को नीचे किया । उसके गुप्ताँग पर एक भी बाल नहीं थे । मेरी उंगलियां उसके गुप्ताँग में समा गयी । मैं अपनी उंगली को उसके गुप्ताँग में अन्दर बाहर करने लगा । मैं उठकर नीचे बैठ गया और उसके गुप्ताँग पर अपनी जीभ रख दी । उसकी मादकता बढ़ती जा रही थी । उसने मेरे बालों को पकड़कर मेरे सर को अपनी जांघों में फ़ंसा लिया । जैसे जैसे मेरी जीभ अपना काम कर रही थी, वह और भी उत्तेजित होती जा रही थी । मैंने अपने आपको उसकी मजबूत पकड़ से मुक्त किया और उसके कपड़ो को निकाल कर उसके पैरो को फ़ैलाया । उसकी सेक्सी चूत मेरे समाने थी जो कि मुझे आमंत्रित कर रही थी । मैंने एक पल की भी देरी किये बिना अपने लण्ड को उसके चूत पर रखा और उसके अन्दर प्रवेश कर गया । और फिर एक दूसरे को धक्के देने का सिलसिला चालू हो गया । हम दोनों की स्पीड बढ़ती जा रही थी । उसके पैर हवा में खुले हुई थे जिससे मुझे उसके अन्दर तक समाने में आसानी हो रही थी । मेरा लण्ड तेजी से उसके अन्दर बाहर हो रहा था । एक जबरदस्त घर्षण मेरा लण्ड उसके चूत की दिवारों पर उत्पन्न कर रहा था । हम दोनों आनन्द की एक दूसरी दुनिया में तैर रहे थे । उसकी चूत से गर्म पानी निकलने लगा जो कि लुब्रीकैंट का काम करने लगा। हम दोनों अपनी चरम सीमा के नजदीक पहूँच रहे थे। हमारे जननांगों से फच्च फच्च की आवाज आने लगी थी । आलीन ने मुझे कसकर पकड़ रखा था । हमारे अन्दर एक जबरदस्त तूफ़ान उबाल मार रहा था । मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी और थोड़ी देर में ही हम दोनों अपने चरम सीमा पर पहूँच गये । हम दोनों के अन्दर एक लावा था जो कि फूट पड़ा ।

हम दोनों के शरीर शांत हो गये । हम थोड़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे । यह मस्ती का दौर रात में फिर चला । यह मेरी सबसे यादगार रैल यात्रा थी ।

Saturday, November 17, 2007

दोस्त की बीवी की चूदाई

हाय राजू हिअर फ़्रोम दिल्ली । इट वाज़ 31st दिसम्बर । मैं 23 साल का यंग हूँ। मेरी हाइट 5 फ़ीट ७ इँच है और गोरा, भरा हुआ शरीर है। 7 इँच का लम्बा लण्ड और 25 इँच चौड़ा है। मैं और शेखर दोस्त है। उसके शादी को 6 महीने ही हुयें थे । सुनीता भाभी का फ़िगर 36 एक्स 28 का है । गोरा रंग और गुलाबी होंठ है । उसके बारे मे मैं जनता था कि वो कालेज में कितने ही दोस्तों से चुदवा चुकी थी। मेरा भी मन उसे चोदना को करता था पर मेरे दोस्त को पता नहीं था ।

मेरा दोस्त की एक शोप है । इस 31st दिसम्बर पर वो 10 दिनों कई लिये बाहर गया हुआ था । मैं उसके घर गया तो सुनीता भाभी अकली थी। सुनीता भाभी बहुत शरारती और सेक्सी है । वो मुझसे हंसी मजाक करती है । उस दिन वो अकली थी। उन्होंने कहा राजू खाना यहाँ खालो और फ़िर हम मूवी देखेंगे । हमने खाना खाया और फ़िर हमने साथ मे मूवी देखने लगे । सुनीता ने रैड कलर की नाइटी पहने हुए थी । उसमे वो बहुत सेक्सी लग रही थी । उसमे उनकी ब्रा साफ़-साफ़ दिख रही थी । उस मूवी मैं 2-3 लिपकिस आयी तो मेरी नज़र उनके ऊपर गयी तो मुझे देख कर वो शर्मा गयी । यह देख कर तो मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था ।

हम दोनों एक ही बिस्तर पर बैठे थे । रात के करीब 11 बजे थे तो मैं ने कहा कि मैं जा रहा हूँ । तो वो बोली कि आप यहीं पर सो जाओ । मेरी तो मुराद पूरी हो रही थी । आज पूरी रात मैं उसको चोदना चाहता था । फिर मैं वहीं पर सो गया । मूवी एण्ड होने के बाद वो भी उसी बिस्तर पर सो गयी । मेरा हाथ उनके बूब्स पर लग गया तो वो कुछ नहीं बोली । मैं ने हिम्मत कर कई उसके होंठों पर होंठ रख दिया तो वो मेरा साथ देने लगी । वो मेरे ऊपर आ गयी तो उसके बूब्स मेरे साइन से दबने लगे । तो मेरा लण्ड तन गया । उसने धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिये ।

मैं सिर्फ़ अण्डर वीअर मे हो गया । फिर मैं ने भी सबसे पहले उसकी साड़ी उतार दी। वो अब ब्लाउज़ और पेटीकोट मे हो गयी । फिर मैंने थोड़ी देर उसे की बूब्स दबाई और ब्लाउज़ और पेटीकोट उतार दिया । अब वो शिर्फ़ पिन्क ब्रा और पैंटी मे गज़ब की सेक्सी लग रही थी । फिर उसने मुझे नंगा कर दिया और फ़िर मैंने भी उसकी ब्रा और पैंटी उतार दी । लाइट की रोशनी मैं उसका पूरा बदन चमक रहा था । फिर हम दोनों एक-दूसरे को चूमने-चाटने लगे । उसके 36 साइज के बूब्स को मैं चूस रहा था । एक मेरे मूँह मैं था और एक हाथ मैं था । वो मेरे लण्ड तो सहला रही थी । करीब हमने 1 ओवर तक चुम्मा-चाटी करी । उसने मेरा पूरा बदन चूमा और मेरे लण्ड को मूँह मे लेकर चूसने लगी । उसने मेरे लण्ड तो बहुत देर तक चूसा और मेरा सारा ज्यूस पी गयी । उसकी चूत एकदम साफ़ थी उस पर एक भी बाल नहीं था । मैंने उसके पैरों को फ़ैलाया और मैं भी उसकी चूत को चूसने लगा ।

10 मिनट्स के बाद उसने पानी छोड़ दिया । हम दोनों फ़िर 69 की पोजीशन मे हो गयी । थोड़े ही देर मे मेरा लण्ड फ़िर तन गया । वो कहने लगी कि मेरे पति का लण्ड तो केवल 5 इंच और 15 इंच का मोटा ही है । उस से मुझे मज़ा नहीं आता है । राजू मुझे आपका लण्ड बहुत पसन्द आया । प्लीज़ जल्दी करो मैं और अब नहीं रूक सकती । प्लीज़ चोद डालो मुझे जल्दी से । मैंने उसकी गाँड के नीचे एक तकीया लगाया और उसके पैरों को फ़ैला दिया । फिर मैंने अपने लण्ड का टोपा उसकी चूत पर रखा तो उसकी चूत का छेद पूरा धक चुका था । मैंने धीरे से दबाया उसके मुँह से चींख निकली आआआआआईईईईईईईई मार डाला प्लीज़ राजू धीरे करो ना । मैंने उसके बूब्स को चुसना शूरू कर दिया थोड़ी देर ऐसा ही उसके ऊपर लेटा रहा और उसे पकड़ के 3-4 धक्के मारे और पूरा डाल दिया। वह रोने लगी और वह इतनी तेज चींखी आआआआआआईईईइ माआआआआआआरररर डाला राजू। पूरी फ़ट गयी है । मैंने बोला कोई बात नहीं डार्लिंग । फिर मैंने उसके बूब्स और होंठों को चूसने लगा फ़िर वो धीरे-धीरे शांत हो गयी । उसने पूछा कितना अंदर गया तो मैंने बोला कि पूरा डाल दिया । मैंने फ़िर धक्के देना शूरू कर दिया। उसका दर्द बढ़ रहा था और धीरे धीरे धक्के देते देते कम हुये। अब मैं थोड़ी से स्पीड बढ़ा दी मेरी स्पीड से वह शिशकियाँ भर रही थी स्स्स्सश्श्श्श्श्श्श्श्श्शशशश राजू मज़ा आ रहा है । आज आपने मेरी चूत फ़ाड़ दी । धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी अपनी गाँड नीचे से उछल-उछल कर चुदवाने लगी। फिर वो 10 मिनट्स मैं ही झड़ गयी और चोदने मे मज़ा आ रहा था और वो फिर थोड़ी देर मे झड़ गया । इस तरह 30 मिनट्स मैं वो 4 बार झड़ चुकी थी ।

मैंने उसे पूछा कि कैसा लग रहा है तो उसने कहा कि बहुत मज़ा आ रहा है । ऐसा मज़ा तो मुझे मेरे पति ने कभी नहीं दिया । थोड़ी ही देर चोद ने के बाद मैं बोला मेरा पानी निकल रहा है तो उसने कहा कि मेरी चूत भर दो राजू और मैंने सारा पानी उसकी चूत मे ही डाल दिया और हम दोनों इसी तरहा लेटे रहे । फिर मैं उठा और बाथरूम मैं जा कर अपना लण्ड साफ़ करा पर सुनीता नहीं उठ पा रही थी क्यों कि उसे चलने मैं तकलीफ़ हो रही थी । मैं उसे उठा कर बाथरूम मे ले गया और उसकी चूत को साफ़ करा ।

हम दोनों ने थोड़ी देर ऐसी ही नंगे लेटे रहे । थोड़ी देर के बाद मैंने उसे चूमना चाटना शूरू कर दिया तो वो भी तैयार हो गयी । हम दोनों फ़िर से 69 पोजीशन मैं हो गयी और वो थोड़ी ही देर मैं झड़ गयी । फिर मैंने उसे डोगी स्टाइल मैं चोदना शूरू कर दिया उसे । मैं ने इस बार एक ही धक्के मैं पूरा का पूरा लण्ड डाल दिया तो उसे के/की मूँह से जोर से चींख निकाल गयी आआआआआआईईईईईईईई मार डाला राजू मैं मर गयी ऊऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआआ रररररररर डाला । उसके बूब्स को पकड़ा और जोर जोर से धक्के मार ने लगा फ़िर उसे भी मज़ा आने लगा । 15 मिनट्स चोदने के बाद मैंने उस की गाँड मैं अपना लण्ड घुसेड़ दिया तो वो जोर से चींखी मर गयी मैं मर गयी प्लीज़ राजू बाहर निकालो तो मैंने एक ना सुनी और धक्के मारता ही गया थोड़ी देर मैं वो शांत हो गयी फ़िर मैंने उसे पूछा कि कैसा लग रहा है तो उसने कहा बहुत मज़ा आ रहा है ।

इसे तरह मैं ने उसकी गाँड और चूत दोनों मारी और मेरे लण्ड का सारा पानी फ़िर उसकी चूत मैं छोड़ दिया । इस तरह मैंने उसे रात मैं 4 बार चोदा और 2 बार उसकी गाँड मारी । शुबह फ़िर से वो ऊपर बैठ के मेरा लण्ड अन्दर ले लिया लेकिन वो ठीक से ले नहीं पा रही थी क्योंकि उसे थोड़ा -2 दर्द हो रहा था फ़िर मैंने उसकी चूत पर सचिन तेण्दुलकर की तरह स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिये और वो सिसकियाँ ले रही थी उफ़ उफ़्फ़ क्या लण्ड है। राजू। काश मैंने तुम से शादी की होती!!! और ज़ोर से चोदो मुझे और इस तरह चोदते-चोदते मेरा पानी उसकी चूत मैं ही निकल गया । फिर वो खाना बना रही थी तो मैंने उसे नंगा कर दिया फ़िर किचन स्टैण्ड पर बिठाया उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखे और उसकी चूत मैं पूरा लण्ड डाल दिया 30-40 मिनट्स चोदने के बाद हमने एक ब्लू फ़िल्म देखी और फ़िर हम ने दिनभर मे 6-7 बार चुदाई करी। वह बोली आज तुमने मुझे वह मज़ा दिया है जिसके सपने मैंने बचपन से देखे थे । आइ लव यू राजू । इस तरह मैंने उसे 10 दिन तक चोदा । उसके बाद मेरा दोस्त आ गया था । उसकी बैड हमने जब भी मौका मिलता हम दोनों नहीं चूकते थे ।

एक कहानी करांची पाकिस्तान से

फ़र्स्ट आइ वाण्ट तो टेल यू अबाउट माइ सेल्फ़ आइ एम राजा मुगल मेल 22 ईअर्स करांची पाकिस्तान 5'5" विद नाइस बोडी एण्ड आइ थिंक क्यूट फेस । और मेरे लण्ड का साइज ९ इन्च है

वह हहमारे घर के पास रहती है और चूदाई से कुछ दिन पहले ही मैं ने इकरार मुहब्बत किया था । वो सिर्फ़ 18 साल की है और बिलकुल ही वर्जिन थी । व्हाइट कलर स्मार्ट लम्बा कद पतले होंठ स्माल टिट्स (बूब्स) छोटी सी गाँड । टाइट फुद्दी बस कयामत का हुस्न है उस का। बहुत ही क्यूट हर तरफ़ से ।

एक दिन वह हमारे घर आई थी जब मैं ने उस को पहली बार देखा और देखते ही उस पर मर मिटा और रात को देर तक उस को चोदने का सोचता रहता। कुछ दिन ऐसा चलता रहा और काफी दिनों बाद वह दोबारा हमारे घर आई और इस बार मुझ से रहा ना गया और मैं ने उस से कह दिया के हमें आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं। मुझे आप से प्यार हो गया है ।

राबिया: अच्छा तो कैसे प्यार हो गया और कब हुआ वैसे सब लड़के एक जायेसे होते हैं। प्यार कुछ दिनों बाद खत्म जब कोई और मिल जाये तो ।

नहीं डीअर ऐसी बात नहीं है रिअली आइ लव यू सो मच ।

अच्छा मैं सोच कर बताऊंगी ।

फिर उस के बाद मेरी तड़प उस के लिये और भी बढ़ गयी और मैं रात को उस के ख्वाब देखता रहा और अचानक एक दिन फिर वह आई और मौका मिलते ही मैं उस के पास गया और जवाब मांगा तो उस ने इशारा कर दिया सर हिला कर के हाँ और मेरी खुशी की इंतेहा ना रही। यकीन ही नहीं हो रहा था कि रिअली उस ने हाँ कर दी ।

थोड़ी देर बाद मौका बना और मैं उस के करीब जा कर खड़ा हो गया और हैंड शेक किया, उस ने फ़ौरन मेरा हाथ पकड़ा और थोड़ी देर बाद छुड़ा लिया । उस दिन सिर्फ़ इतना ही हुआ एक दो बार हाथ पकड़ा और उस से ज्यादा कुछ नहीं कर सकें और ना ही मौका था ।

फिर कुछ ही दिन गुजारे और वह दोबारा हमारे घर आई उस दिन सण्डे था और मैं सण्डे को देर तक सोता हूँ और वह जल्दी आ गयी और मैं सो रहा था। घर पर सिर्फ़ मोम थीं और कोई नहीं था और मैं अपने रूम मैं सो रहा था । मॉम टी वी पर जिओ न्यूज़ सुन रही थीं

मैं सो रहा था और अचानक एक बहुत ही प्यारी आवाज मे मैंने अपना नाम सुना और आँख खोली तो सामने राबिया खड़ी थी ।

अरे!!! आप और इतनी सुबह और हमारे रूम मे! आज सूरज कहाँ से निकला जनाब ।

राबिया: मैं ने सोचा आज आप को छूट्टी है इस लिये मिल आओ और आप हैं के अभी तक सो रहे हैं । हमारे लिये क्या हुक़ुम है हम वेट करेंगे जनाब का या चले जायें क्यों कि आँटी भी टी वी देख रही हैं और मैं अकेली क्या करुँगी यहाँ ।

हम जो हैं आप को कम्पनी देने के लिये लेकिन सिर्फ़ थोड़ी देर वेट करें, अभी तैयार हो जाते हैं । और इस दौरान मैं ने उस के हैंड पर बहुत सारे किस कर लिये उस ने कुछ भी नहीं कहा ना ही मना किया, बस आराम से बैठी रही हमारे सामने ।

थोड़ी देर हम बातें करते रहे उस के बाद मैं ने उस से कहा के क्या मैं आप को किस कर सकता हूँ तो उस ने कहा इतने तो कर लिये बिना इजाजत और अब इजाजत मांग रहे हैं वह क्या बात है आप की ।

जनाब इस बार हम आप के होंठ पर किस करना चाहते हैं अगर माइण्ड ना करें और इजाजत हो तो ।

राबिया: मैं क्या कह सकती हूँ क्योंकि मुझे शर्म आती है आप की मर्जी है ।

हैलो मैडम जब आप यहाँ आया करेंगे उस वक्त शर्म घर पर छोड़ आया करें। यहाँ हमारे साथ शर्म का कोई काम नहीं है अण्डरस्टैण्ड।

राबिया: ओ के एज़ यू विश। जो दिल चाहे कर लें लेकिन सिर्फ़ ऊपर तक ही रहना है नीचे नहीं जान/जाना अभी ।

अरे डरो नहीं हमारा हक सिर्फ़ आप के पेट (स्तॉमक) के ऊपर तक है नीचे हमारा क्या काम । वैसे क्या डर लगता है आप को मुझ से ।

राबिया: जी लगता तो है लेकिन बहुत कम मुझे 20% डर लगता है और 80% नहीं लगता ।

उस के बाद मैं उठा और नहा धो कर तैयार हो कर वापिस आ गया और वह मोम के साथ बैठी थी। मैं जब अच्छी तरहा तैयार हो गया तो टी वी लौंज मे आया और देखा मोम नहीं थीं वह बाथ मे थीं। मैं ने मौका देखते ही फ़ायदा उठाया और राबिया को इशारा से कहा के ऊपर आ जाओ और बाहर जाने का बाहना कर के मोम से पूछा के मैं बाहर जा रहा हूँ कोई काम है? मोम ने कहा नहीं कोई काम नहीं है और मैं खामोशी से ऊपर चढ़ गया और थोड़ी देर बाद राबिया भी आ गयी। अब मोम को यही पता था के मैं बाहर गया हुआ हूँ और राबिया अपने घर चली गयी है लेकिन उन्हें क्या पता के उन का बेटा क्या गुल खिला रहा है ऊपर ।

ऊपर जाते ही मैं ने राबिया से कहा के आओ और मुझे गले मिलो ।

उस ने कहा नहीं मुझे शर्म आती है ।

मैं ने कहा देखो मैं ने पहले कहा था ना के शर्म घर रख कर आया करो जब मुझ से मिलने आया करो ।

तो वह उठी और नजदीक आ गयी और उस वक्त मेरा लण्ड बिलकुल ही सख्त हो गया था और मैं आगे हुआ और उस को गले से लगा कर उस के पूरे चेहरे पर किसिन्ग करने लगा और इस से थोड़ी देर बाद उस को भी मज़ा आने लगा ।

मैं ने उस के कान मे कहा कि

राबिया क्या मैं आप के बूब्स को हाथ लगा सकता हूँ क्यों कि मुझे आप के बूब्स बहुत अच्छे लगते हैं और मैं इन के साथ खेलना चाहता हूँ ।

उस ने कहा जो दिल कहे वही करो मुझ से कुछ मत पूछो क्यों कि मुझे शर्म आती है और मैं कुछ नहीं कहुँगी आप ने जो करना है वही करें बस ।

ओके जायेसे आप की मर्जी हम तो हुक़ुम के गुलाम हैं ।

उस के बाद मैं ने उस को थोड़ी देर खड़े खड़े ही किस किया और गले से लगाये रखा और एक हाथ उस की कमर पर फेरता रहा और दूसरे से उस के बूब्स को आराम आराम से मसलता रहा ताकी उस को ज्यादा से ज्यादा मज़ा मिले और जल्दी होट हो जाये। और आगे कुछ भी करने से मना ना करे ।

फिर मैं ने उस को बेड पर लिटा दिया और उस के साथ लेट गया और एक हाथ उस के चेस्ट पर रखा और बड़े प्यार से मसलने लगा और साथ साथ बातें भी करता रहा उस का रिअक्शन देखने के लिये । अभी तक वह नोर्मल ही थी और कुछ ना बोली मैं ने यह देखा और अपना हाथ उस की कमीज के अन्दर डालने लगा तो उस ने फ़ौरन मेरा हाथ पकड़ा और मेरी तरफ़ देखा कर कहा ।

शी, देखो अली मुझे तुम पर यकीन है लेकिन थोड़ा डर भी लगता है कहीं कुछ गलत ना ही जाये हम से । तुम जो चाहो करो मैं मना नहीं करुँगी लेकिन ऐसा कुछ मत करना जिस से मेरी जिन्दगी तबाह हो जाये और मैं किसी को मूँह दिखाने के लाइक ही ना रहूँ ।

राबिया अगर मुझ पर यकीन है तो सुनो मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ और तुम से शादी करने की कोशिश भी करुँगा लेकिन तूम किस्मत के फ़ैसले को तो मानती हो ना अगर किस्मत मे हुआ तो जरूर होगी हमारी शादी वर्ना नहीं और मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूँ अभी इसी वक्त। क्योंकि मुझ से वेट नहीं होता और रही जिन्दगी तबहा होंने वाली बात तो आज कल हर दूसरी लड़की ये सब करती है तुम कोई पहली लड़की नहीं हो और हम किसी को बता थोड़ा रहे हैं जो तुम्हारी जिन्दगी तबाह हो जायेगी ।

राबिया: वह तो ठीक है लेकिन अगर कुछ गड़बड़ हो गयी तो बच्चा हो गया तो कैसे छूपाऊँगी । इस लिये डरती हूँ । और दर्द भी होता है उस से भी डर लगता है । क्योंकि कुछ दिन पहले मैं अपनी कज़िन की शादी पर गयी थी उस ने सब बाते की कि क्या हुआ था पहली रात ।

हाँ दर्द तो होता है लेकिन फ़िक्र मत करो मैं आराम से करुँगा कुछ भी नहीं होगा और बच्चा ऐसे ही नहीं होता जब तक कम अन्दर ना जाये तब तक कुछ नहीं होता और ना ही किसी को ऐसे पता चलेगा रिअली बिलीव मी ।

इस के बाद वह मुस्करा कर आंखें बन्द कर के आराम से जैसे थी वैसे ही लेटी रही और मुझे इशारा मिला के उस की तरफ़ से हाँ है । मैं अब दिल मे बहुत खुश था ।

मैं ने जल्दी से उस को किस करना शुरू कर दिया और उस की कमीज ऊपर कर दी उस ने ब्लैक ब्रा पहना हुआ था मैं ने पूछा के क्या साइज है ब्रा का तो वह बोली 32c ।

फिर मैं ने उस को उठाया और कमीज उतार दी और ब्रा भी। अब वह आधी नंगी थी लेकिन मैं क्लोथ्स मे ही था अभी तक । मैं ने उस के बूब्स को बारी बारी चूसना शुरू कर दिया और अपना एक हाथ उसकी कमर पर रगड़ने लगा और दूसरा उसकी चूत पर ले गया और आराम से उसकी चूत पर हाथ रगड़ने लगा और जब हाथ सलवार मे डालना चाहा तो उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा ।

हाथ अन्दर मत डालो प्लीज़ मुझे रिअली बहुत शर्म आ रही है क्योंकि आज ही मैं ने शेव की है और कभी किसी को दिखाई भी नहीं इस लिये प्लीज़ सलवार मत उतारो ।

ऐसे कैसे मज़ा आयेगा और कैसे चोदूंगा अगर सलवार नहीं उतारी तो । फिर मैं ने उस को किसिंग करते करते इतना गर्म कर दिया के मैं ने उसकी सलवार उतारने की कोशिश की तो उस ने मुझे रोका नहीं बल्कि खुद ही अपनी गाँड ऊपर उठा कर मेरी हेल्प की सलवार उतारने मे। फिर वो एक दम नंगी मेरे सामने थी। मैं ने उस के जिस्म पर किस करना शुरूँ कर दिया वो जोश मे आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कर रही थी मुझे उसकी आवाज सुन कर बहुत मज़ा आ रहा था फिर उस ने मुझ से कहा प्लीज़ अली जो कुछ भी करना आराम से करना मुझे दर्द बिलकुल अच्छा नहीं लगता इस लिये आराम से करना और जितना हो सकें मज़ा देना ।

फिर मैं ने एक फ़िंगर उस के कण्ट मे ऊपर ही फेरना शुरू कर दी और किसिंग भी करता रहा कभी लिप्स पर कभी बूब्स कभी निप्पल्स सक करता कभी कहीं मैं पूरे जिस्म पर किस किया और किस करते करते उसकी चूत पर ज़ुबान से चाटना शुरूँ कर दिया तो उस को बहुत मज़ा आने लगा और वो ज़ोर ज़ोर से आवाजें निकालने लगी। अली प्लीज़ और करो। बहुत मज़ा आ रहा है मेरी चूत को और चाटों। अपनी पूरी ज़ुबान मेरी चूत मे डाल दो। प्लीज़ बहुत मज़ा आ रहा है और थोड़ी देर बाद जब महसूस हुआ के वह होट हो रही हैं तो मैंने अपनी फ़िंगर उसकी चूत मे डाली बिलकुल आराम से ।

राबिया: ऊह अली प्लीज़ आराम से करना मुझे बहुत डर लैग रहा है लेकिन मज़ा भी आ रहा है। रिअली बहुत अच्छा फ़ील कर रही हूँ मैं। आज तक ऐसा कभी फ़ील नहीं हुआ आराम से अन्दर करो प्यार से बहुत ही प्यार से प्लीज़ आआआआहहहहहह हाँ मज़ा आ अहा है। ऐसे ही उफ़्फ़ ऐसा क्यों हो रहा है हमारे साथ। मुझमे इतनी गर्मी क्यों है? आग लगी हुई है जिस्म मे!!! बुझा दो इस आग को। कुछ करो बहुत ही गर्मी लग रही है मुझे। आह्ह मज़ा बहुत आ रहा है। उऊऊउऊउमममममम ऊह्ह अली आह्ह ऊह्ह अभी एक ही फ़िंगर ठीक है मज़ा आ रहा है । नहीं प्लीज़ दूसरी अन्दर मत करो ना ऐसे ही अच्छा महसूस हो रहा है आह्ह ।

देखा राबिया कितना मज़ा है इस काम मे और जनाब आप के कपड़े तो उतर गयी हमारे कौन उतारेगा।

राबिया: जो करना है खुद करो मुझे बस मज़ा दो। जितना हो सकें और जल्दी करो कहीं कोई आ ना जाये मेरा पता करने और हम पकड़े ना जाये। प्लीज़ जल्दी करो अली ।

मैंने अपने क्लोथ्स उतार दिये और फिर उस के साथ लेट गया और उस को बाँहों मे जकड़ लिया और थोड़ा ज़ोर लगा कर उस को दबाया और फिर अपना काम शुरू कर दिया। फ़िंगरिंग एण्ड किसिंग एण्ड रबिंग ।

राबिया: हाँ मज़ा आ रहा है ओओओहहहह अली करते जाओ करते जाओ ऊह्ह उउउहहह अरे ये क्या सख्त और होट चीज़ मुझे लग रही है तांगों मे ?

यही तो है जिस का सारा काम है। जिस ने आप को और मुझे खूब मज़ा देना है यही तो अन्दर डालूंगा तुम्हारी चूत मे लेकिन थोड़ा इस के सर पर हाथ फेरो। इस को प्यार करो उस के बाद ये तुम्हें अपना काम दिखाइयेगा ।

उस ने मेरा लण्ड आपमे हाथ मे पकड़ा और उस को सहलाने लगी और उस को बहुत अच्छा फ़ील हो रहा था ऐसा करते और करवाते हुये। वह बहुत होट हो गयी थी शायद अब बर्दाश्त नहीं कर रही थी अपने और हमारे बदन की हीट ।

राबिया: उफ़्फ़ हो इतना मज़ा आ रहा है। तुम ने पहले क्यों नहीं बताया था कि इतना मज़ा आता है इस काम मे मैं तो कब से प्यार करती थी तुम्हें और तुम ने इतना टाइम लगा दिया कहने मे। लेकिन जो हुआ अच्छा हुआ क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है सुना तो था आज देख भी रही हूँ। आज मुझे खूब मज़ा दो। प्लीज़ मुझे प्यार करो। मुझे थँडा कर दो अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है । मैंने उस से कहा के मेरे लण्ड को मुँह मे डाल कर लोलीपोप की तरह चूसो। पहले उस ने मना किया लेकिन जब मैं ने उसको कहा कि मैं ने तुम्हारी चूत को भी चाटा था तो वो मान गयी और उस ने मेरे लण्ड को किस करना शुरूँ कर दिया और फिर मुँह मे ले कर चूसने लगी। मैं बता नहीं सकता मुझे कितना मज़ा आ रहा था। मैं ने उस को 69 पोजिशन मे कर दिया और उसकी चूत को सक करना शुरूँ कर दिया वो मेरा लण्ड सक कर रही थी और मैं उस की चूत 15 मिनट तक सक करने के बाद उसकी चूत से जूस निकलने लगा और मैं ने सारा जूस चाट चाट कर साफ़ कर दिया। उस के बाद मैं ने राबिया से कहा कि अब तुम लेट जाओ और उस को बेड पर लिटा कर उसकी गाँड के नीचे एक तकीया रख दिया जिस से उस की चूत ऊपर की तरफ़ उठ गयी फिर मैं ने उस की टाँगें ऊपर उठा दी तो उस ने पूंछा

टांगे क्यों उठा रहे हो अब के इरादा है ऐसे क्या होगा ।

अब चूदाई करने जा रहा हूँ और आप ने भी साथ देना है। पेन पर कण्ट्रोल करना है और चिल्लाना भी नहीं ह॥ मेरी खातिर बर्दाश्त कर लो थोड़ी देर बाद बहुत मज़ा मिलेगा। ओ के तैयार हो करुँ अन्दर ।

हाँ मैं तैयार हूँ और तुम्हारा साथ भी दूँगी। तुम बेफ़िक्र हो कर अपना काम करो। बस मुझे मज़ा दो चाहे जैसेभी और तुम भी कोशिश करना आराम से और प्यार से करने की जिस से दर्द कम और मज़ा ज्यादा मिले ऐसा काम करना ।

मैं ने उस की चूत पर लण्ड रखा ठीक निशाने पर और आराम से अन्दर करने लगा। वह बहुत टाइट थी और उस को तकलीफ भी होना शुरू हो गयी

आराम से डालो आराम से हाँ आहिस्ता आहिस्ता प्यार से करो अन्दर। उफ़्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है हाँ थोड़ा और करो हाँ आराम से। ऊई माँ। अली दर्द हो रहा है लेकिन तुम रुको नहीं बस आराम आराम से अन्दर करते जाओ मज़ा आ रहा है। ऊऊऊउहहहहहहहह मममममाआआआआ आराम से हाँ ऐसे ओओओओहोहोहोहो करो और अन्दर करो उई मां बहुत दर्द हो रहा है आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्म्म्म्म्म्म्म हमारे लिप्स सक करो्। बूब्स को रगड़ो। प्लीज़ मुझे प्यार भी करो अली ।

अभी तक मेरा आधा लण्ड उस के अन्दर घुसा था और अब उस को पेन भी बहुत हो रहा था इस लिये मैं ने वही तक ही अन्दर रखा और आहिस्ता आहिस्ता हिलने लगा ताकी उस को मज़ा ज्यादा और दर्द कम महसूस हो । मेरा लण्ड अभी 2 इँच ही अन्दर गया था और अन्दर नहीं जा रहा था। कोई चीज़ और अन्दर जाने से रोक रही थी मैं समज गया के यह उसकी चूत की सील है जो लण्ड को और अन्दर नहीं जाने दे रही। थोड़ी देर तक मैं 2 इँच लण्ड ही अन्दर बाहर करता रहा। फिर राबिया बोली हाँ अब ठीक है अब करो। अन्दर एक ही झटके से अन्दर बाहर करो ।

उस ने सोचा पूरा अन्दर जा चुका है इसी लिये ऐसा कहा और मैं ने भी नहीं बताया के अभी 2 इँच ही अन्दर है। और 5 इँच बाहर। बस उस का यही कहना था कि मैं ने उस के लिप्स पर अपने लिप्स रखे और एक ज़ोरदार फ़ुल पावर से झटका मारा और पूरा लण्ड अन्दर गुम हो गया ।

लण्ड अन्दर जाते ही उस ने एक जोर दार चींख मारी लेकिन हमारे मुँह मे ही रही उसकी चींख और उस के आँख से पानी निकाल आया। थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा और जब देखा के अब कुछ नोर्मल है तो मैं ने उस के लिप्स फ़्री कर दिये और उस ने गुस्से से मेरी आंखों मे देखा और रोने लगी । उसकी चूत से खून निकलना शुरूँ हो गया था ।

आइ एम सॉरी राबिया। प्लीज़ रो मत और तुम ने खुद ही तो कहा था के झटका मार कर अन्दर बाहर करुँ और अब तुम रो रही हो ।

शी, मैं ने कहा था लेकिन मुझे क्या पता था अभी बाहर भी बचा है और जनाब ने भी बताने की तकलीफ भी महसूस नहीं की। बहुत बुरे हो तुम अब कुछ नहीं करने दूँगी। बस आज पहली और आखिरी बार कर लो जितना और जैसा करना है इस के बाद कभी नहीं करेंगे ।

लेकिन एक बात है उस वक्त दर्द बहुत हुआ ऐसा लगा जैसे किसी ने चाकू मार दिया हो और मेरी चूत चीर डाली हो लेकिन अब कुछ दर्द कम हो गया है पहले से। बहुत जालिम हो तुम अब निकालो इस को बाहर। थोड़ा दर्द कम होंने दो उस के बाद करना अभी कुछ मत करो ।

ठीक है लेकिन अन्दर ही रहने दो मैं नहीं हिलूंगा और जब दर्द खत्म हो जायेगा फिर स्टार्ट करेंगे ।

नहीं इतनी देर अन्दर ही रहा तो मैं मर जाऊँगी बस करो जैसा करना है मैं बर्दाश्त करती हूँ । लेकिन करना आराम से और करो भी जल्दी। मैं ने जाना भी है ।

हाँ ऐसे ही प्यार से करो बहुत मज़ा आ रहा है पहले से नहीं कर सकते थे गन्दे बच्चे ।

उउउहहह यस अब ठीक है। अच्छा फ़ील हो रहा है अब और कितनी देर करना है। बस भी करो ना मैं थक गयी हूँ। 10 मिनट से मेरी टाँगें उठा कर हमारे ऊपर चढ़े हैं जनाब कोई एहसाह भी है मेरा या नहीं ।

बस जान थोड़ी सी देर और ओनली 2 मिनट आइ एम निअर तो कम ।

ओके कर लो लेकिन सिर्फ़ 2 मिनट हैं आआआहहहह आराम से करो ना अली। आराम से करो प्लीज़ दर्द होता है। ओअओअओअओ नो मैं नाराज हो जाऊँगी सच्ची कहती हूँ ।

जान आखिर मे मत रोको मुझे मज़ा लेने दो आखिर मे मैं ऐसे ही चोदता हूँ ।

अच्छा लेकिन थोड़ा सा तो आहिस्ता करो सच्ची दर्द हो रहा है प्लीज़ इतना कहा भी नहीं मानोगे आआआहहहह।

सच्ची बहुत दर्द हो रहा है ऊफ़ माआआआआ आज कहाँ फ़ंस गयी मैं अच्छी भली घर मे बैठी थी पता नहीं क्या हुआ यहाँ आ गयी तुम से चुदवाने ।

अली हाँ हाँ करो अब कुछ अच्छा लग रहा है करो ऐसे ही करते रहो अब मुझे अच्छा लग रहा है मज़ा आ रहा है। अब है कितना अच्छा है चुदवाना। काश मैं तुम्हारी बीवी होती उससे डैली तो करते। हाँ करो और तेज और तेज करो ओह्ह्ह अली आह्ह।

तुम्हारी सांस क्यों तेज आ रही है ।

बिकोज़ आइ एम सो निअर तो कम राबिया दबाओ मुझे हाथ मेरी कमर पर रख करो जितना ज़ोर है दबाओ अपने सीने से लगा लो मैं आ रहा हूँ आइ एम कमिंग जान ।

हाँ हाँ ज़ोर से और तेज प्लीज़ अब मज़ा आ रहा है हमारे अन्दर कुछ हो रहा है जैसे पी आ रहा हो करो करो अब मत रुकना ओह कुछ निकाल रहा है आह ओह ऊह नो क्या हो रहा है। आइ एम डाइंग करो आरिफ़ रुको नहीं ओह आइ फ़ील समथिंग इन मी। अओह तुम छूट गयी ना आअह मुझ मे कुछ गिर रहा है। अली बहुत मज़ा आ रहा है ओह्। चोदो मुझे बहुत मज़ा आ रहा है जान आइ लव यू ।

हम दोनों एक साथ ही फ़ारिग हुये और एक दूसरे के साथ लिपट कर कुछ देर लेटे रहे उस के बाद दोनों उठ कर बैठ गयी और थोड़ी देर बातें करते रहे और किसिंग भी। फिर क्लोथ्स पहन कर चोरी से पहले वह उस का बाद मैं चले गया।

Tuesday, December 26, 2006

A sister seduces her younger brother

दोस्तों, hindi_internet_love_making_stories@yahoo.com पर jay_prabhu111 द्वारा 3 मार्च 2004 को भेजी गयी कहानी हिन्दी फ़ोण्ट में प्रस्तुत है। अपनी प्रतिक्रिया (Comments) लिखना ना भूलें।

मेरा नाम आशा है । मेरा छोटा भाई दसवी मैं पढ़ता है । वह गोरा चिट्टा और करीब मेरे ही बराबर लम्बा भी है । मैं इस समय १९ की हूँ और वह १५ का । मुझे भैय्या के गुलाबी होंठ बहूत प्यारे लगते हैं । दिल करता है कि बस चबा लूं । पापा गल्फ़ में है और माँ गवर्नमेंट जोब में । माँ जब जोब की वजह से कहीं बाहर जाती तो घर मैं बस हम दो भाई बहन ही रह जाते थे । मेरे भाई का नाम अमित है और वह मुझे दीदी कहता है । एक बार मान कुछ दिनों के लिये बाहर गयी थी । उनकी इलेक्शन ड्यूटी लग गयी थी । माँ को एक हफ़्ते बाद आना था । रात मैं डिनर के बाद कुछ देर टी वी देखा फ़िर अपने-अपने कमरे मैं सोने के लिये चले गये।

करीब एक आध घण्टे बाद प्यास लगने की वजह से मेरी नींद खुल गयी । अपनी सीधे टेबल पर बोटल देखा तो वह खाली थी । मैं उठ कर किचन मैं पानी पीने गयी तो लौटते समय देखा कि अमित के कमरे की लाइट ओन थी और दरवाज़ा भी थोड़ा सा खुला था । मुझे लगा कि शायद वह लाइट ओफ़ करना भूल गया है मैं ही बन्द कर देती हूँ । मैं चुपके से उसके कमरे में गयी लेकिन अन्दर का नजारा देखकर मैं हैरान हो गयी ।

अमित एक हाथ मैं कोई किताब पकड़ कर उसे पढ़ रहा था और दूसरा हाथ से अपने तने हुए लण्ड को पकड़ कर मुठ मार रहा था । मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि इतना मासूम लगने वाला दसवी का यह छोकरा ऐसा भी कर सकता है । मैं दम साधे चुपचाप खड़ी उसकी हरकत देखती रही, लेकिन शायद उसे मेरी उपस्थिति का आभास हो गया । उसने मेरी तरफ़ मुँह फेरा और दरवाजे पर मुझे खड़ा देखकर चौंक गया। वह बस मुझे देखता रहा और कुछ भी ना बोल पाया । फिर उसने मुँह फ़ेर कर किताब तकिये के नीचे छुपा दी । मुझे भी समझ ना आया कि क्या करूं । मेरे दिल मैं यह ख्याल आया कि कल से यह लड़का मुझसे शर्मायेगा और बात करने से भी कतरायेगा । घर मैं इसके अलावा और कोई है भी नहीं जिससे मेरा मन बहलता । मुझे अपने दिन याद आये। मैं और मेरा एक कज़िन इसी उमर के थे जब से हमने मज़ा लेना शुरू किया था तो इसमें कौन सी बड़ी बात थी अगर यह मुठ मार रहा था ।

मैं धीरे-धीरे उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसके पास ही बैठ गयी। वह चुपचाप लेटा रहा । मैंने उसके कंधो को दबाते हुई कहा, "अरे यार अगर यही करना था तो कम से कम दरवाज़ा तो बन्द कर लिया होता" । वह कुछ नहीं बोला, बस मुँह दूसरी तरफ़ किये लेटा रहा । मैंने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी तरफ़ किया और बोली "अभी से ये मज़ा लेना शुरू कर दिया। कोई बात नहीं मैं जाती हूँ तो अपना मज़ा पूरा कर ले। लेकिन जरा यह किताब तो दिखा। मैंने तकिये के नीचे से किताब निकाल ली। यह हिन्दी मैं लिखे मस्तराम की किताब थी। मेरा कज़िन भी बहूत सी मस्तराम की किताबें लाता था और हम दोनों ही मजे लेने के लिये साथ-साथ पढ़ते थे। चुदाई के समय किताब के डायलोग बोल कर एक दूसरे का जोश बढ़ाते थे।

जब मैं किताब उसे देकर बाहर जाने के लिये उठी तो वह पहली बार बोला, "दीदी सारा मज़ा तो आपने खराब कर दिया, अब क्या मज़ा करुंगा।
"अरे! अगर तुमने दरवाज़ा बन्द किया होता तो मैं आती ही नहीं।
"और अगर आपने देख लिया था तो चुपचाप चली जाती।

अगर मैं बहस मैं जीतना चाहती तो आसानी से जीत जाती लेकिन मेरा वह कज़िन करीब ६ मंथ्स से नहीं आया था इसलिये मैं भी किसी से मज़ा लेना चाहती ही थी। अमित मेरा छोटा भाई था और बहूत ही सेक्सी लगता था इसलिये मैंने सोचा कि अगर घर में ही मज़ा मिल जाये तो बाहर जाने की क्या जरूरत? फिर अमित का लौड़ा अभी कुंवारा था। मैं कुँवारे लण्ड का मज़ा पहली बार लेती, इसलिये मैंने कहा, "चल अगर मैंने तेरा मज़ा खराब किया है तो मैं ही तेरा मज़ा वापस कर देती हूँ। फिर मैं पलंग पर बैठ गयी और उसे चित लिटाया और उसके मुर्झाये लण्ड को अपनी मुट्ठी में लिया। उसने बचने की कोशिश की पर मैंने लण्ड को पकड़ लिया था। अब मेरे भाई को यकीन हो चुका था कि मैं उसका राज नहीं खोलूंगी, इसलिये उसने अपनी टांगे खोल दी ताकि मैं उसका लण्ड ठीक से पकड़ सकूँ। मैंने उसके लण्ड को बहूत हिलाया-डूलाया लेकिन वह खड़ा ही नहीं हुआ। वह बड़ी मायूसी के साथ बोला "देखा दीदी अब खड़ा ही नहीं हो रहा है।

"अरे! क्या बात करते हो? अभी तुमने अपनी बहन का कमाल कहाँ देखा है। मैं अभी अपने प्यारे भाई का लण्ड खड़ा कर दूंगी। ऐसा कह मैं भी उसके बगल में ही लेट गयी। मैं उसका लण्ड सहलाने लगी और उससे किताब पढ़ने को कहा। "दीदी मुझे शर्म आती है। "साले अपना लण्ड बहन के हाथ में देते शर्म नहीं आयी। मैंने ताना मारते हुए कहा "ला मैं पढ़ती हूँ। और मैंने उसके हाथ से किताब ले ली । मैंने एक स्टोरी निकाली जिसमे भाई बहन के डायलोग थे। और उससे कहा, "मैं लड़की वाला बोलूँगी और तुम लड़के वाला। मैंने पहले पढ़ा, "अरे राजा मेरी चूचियों का रस तो बहूत पी लिया अब अपना बनाना शेक भी तो टेस्ट कराओ" ।

"अभी लो रानी पर मैं डरता हूँ इसलियेकि मेरा लण्ड बहूत बड़ा है, तुम्हारी नाजुक कसी चूत में कैसे जायेगा?

और इतना पढ़कर हम दोनों ही मुस्करा दिये क्योंकि यह हालत बिलकुल उलटे थे। मैं उसकी बड़ी बहन थी और मेरी चूत बड़ी थी और उसका लण्ड छोटा था। वह शर्मा गया लेकिन थोड़ी सी पढ़ायी के बाद ही उसके लण्ड मैं जान भर गयी और वह तन कर करीब ६ इँच का लम्बा और १५ । इँच का मोटा हो गया। मैंने उसके हाथ से किताब लेकर कहा, "अब इस किताब की कोई जरूरत नहीं । देख अब तेरा खड़ा हो गया है । तो बस दिल मैं सोच ले कि तू किसी की चोद रहा है और मैं तेरी मु्ठ मार देती हूँ" ।

मैं अब उसके लण्ड की मु्ठ मार रही थी और वह मज़ा ले रहा था । बीच बीच मैं सिस्कारियां भी भरता था । एकाएक उसने चूतड़ उठा कर लण्ड ऊपर की ओर ठेला और बोला, "बस दीदी" और उसके लण्ड ने गाढ़ा पानी फेंक दिया जो मेरी हथेली पर गिरा । मैं उसके लण्ड के रस को उसके लण्ड पर लगाती उसी तरह सहलाती रही और कहा, "क्यों भय्या मज़ा आया"

"सच दीदी बहूत मज़ा आया" । "अच्छा यह बता कि ख़्यालों मैं किसकी ले रहे थे?" "दीदी शर्म आती है । बाद मैं बताऊँगा" । इतना कह उसने तकिये मैं मुँह छुपा लिया ।

"अच्छा चल अब सो जा नींद अच्छी आयेगी । और आगे से जब ये करना हो तो दरवाज़ा बन्द कर लिया करना" । "अब क्या करना दरवाज़ा बन्द करके दीदी तुमने तो सब देख ही लिया है" ।

"चल शैतान कहीं के" । मैंने उसके गाल पर हलकी सी चपत मारी और उसके होंठों को चूमा । मैं और किस करना चाहती थी पर आगे के लिये छोड़ कर वापस अपने कमरे में आ गयी । अपनी सलवार कमीज उतार कर नाइटी पहनने लगी तो देखा कि मेरी पैंटी बुरी तरह भीगी हुयी है । अमित के लण्ड का पानी निकालते-निकालते मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया था । अपना हाथ पैंटी मैं डालकर अपनी चूत सहलाने लगी ऊंगलियों का स्पर्श पाकर मेरी चूत फ़िर से सिसकने लगी और मेरा पूरा हाथ गीला हो गया । चूत की आग बुझाने का कोई रास्ता नहीं था सिवा अपनी उँगली के । मैं बेड पर लेट गयी । अमित के लण्ड के साथ खेलने से मैं बहूत एक्साइटिड थी और अपनी प्यास बुझाने के लिये अपनी बीच वाली उँगली जड़ तक चूत मैं डाल दी । तकिये को सीने से कसकर भींचा और जान्घों के बीच दूसरा तकीया दबा आंखे बन्द की और अमित के लण्ड को याद करके उँगली अन्दर बाहर करने लगी । इतनी मस्ती चढ़ी थी कि क्या बताये, मन कर रहा था कि अभी जाकर अमित का लण्ड अपनी चूत मैं डलवा ले । उँगली से चूत की प्यास और बढ़ गयी इसलिये उँगली निकाल तकिये को चूत के ऊपर दबा औन्धे मुँह लेट कर धक्के लगाने लगी । बहुत देर बाद चूत ने पानी छोड़ा और मैं वैसे ही सो गयी ।

सुबह उठी तो पूरा बदन अनबुझी प्यास की वजह से सुलग रहा था । लाख रगड़ लो तकिये पर लेकिन चूत मैं लण्ड घुसकर जो मज़ा देता है उसका कहना ही क्या । बेड पर लेटे हुए मैं सोचती रही कि अमित के कुँवारे लण्ड को कैसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया जाये । फिर उठ कर तैयार हुयी । अमित भी स्कूल जाने को तैयार था । नाश्ते की टेबल हम दोनों आमने-सामने थे । नजरें मिलते ही रात की याद ताजा हो गयी और हम दोनों मुस्करा दिये । अमित मुझसे कुछ शर्मा रहा था कि कहीं मैं उसे छेड़ ना दूँ । मुझे लगा कि अगर अभी कुछ बोलूँगी तो वह बिदक जायेगा इसलिये चाहते हुई भी ना बोली ।

चलते समय मैंने कहा, "चलो आज तुम्हे अपने स्कूटर पर स्कूल छोड़ दूँ" । वह फ़ौरन तैयार हो गया और मेरे पीछे बैठ गया । वह थोड़ा सकुचाता हुआ मुझसे अलग बैठा था । वह पीछे की स्टेपनी पकड़े था । मैंने स्पीड से स्कूटर चलाया तो उसका बैलेंस बिगड़ गया और सम्भालने के लिये उसने मेरी कमर पकड़ ली । मैं बोली, "कसकर पकड़ लो शर्मा क्यों रहे हो?"

"अच्छा दीदी" और उसने मुझे कसकर कमर से पकड़ लिया और मुझसे चिपक सा गया । उसका लण्ड खड़ा हो गया था और वह अपनी जान्घों के बीच मेरे चूतड़ को जकड़े था ।
"क्या रात वाली बात याद आ रही है अमित"
"दीदी रात की तो बात ही मत करो । कहीं ऐसा ना हो कि मैं स्कूल मैं भी शुरू हो जाऊँ" । "अच्छा तो बहूत मज़ा आया रात में"
"हाँ दीदी इतना मज़ा जिन्दगी मैं कभी नहीं आया । काश कल की रात कभी खत्म ना होती । आपके जाने के/की बाद मेरा फ़िर खड़ा हो गया था पर आपके हाथ मैं जो बात थी वो कहाँ । ऐसे ही सो गया" ।

"तो मुझे बुला लिया होता । अब तो हम तुम दोस्त हैं । एक दूसरा के काम आ सकते हैं" ।
"तो फ़िर दीदी आज राख का प्रोग्राम पक्का" ।
"चल हट केवल अपने बारे मैं ही सोचता है । ये नहीं पूछता कि मेरी हालत कैसी है? मुझे तो किसी चीज़ की जरूरत नहीं है? चल मैं आज नहीं आती तेरे पास।
"अरे आप तो नाराज हो गयी दीदी । आप जैसा कहेंगी वैसा ही करुंगा । मुझे तो कुछ भी पता नहीं अब आप ही को मुझे सब सिखाना होगा" ।

तब तक उसका स्कूल आ गया था । मैंने स्कूटर रोका और वह उतरने के बाद मुझे देखने लगा लेकिन मैं उस पर नज़र डाले बगैर आगे चल दी । स्कूटर के शीशे मैं देखा कि वह मायूस सा स्कूल में जा रहा है । मैं मन ही मन बहूत खुश हुयी कि चलो अपने दिल की बात का इशारा तो उसे दे ही दिया ।

शाम को मैं अपने कालेज से जल्दी ही वापस आ गयी थी । अमित २ बजे वापस आया तो मुझे घर पर देखकर हैरान रह गया । मुझे लेटा देखकर बोला, "दीदी आपकी तबीयत तो ठीक है?" "ठीक ही समझो, तुम बताओ कुछ होमवर्क मिला है क्या" "दीदी कल सण्डे है ही । वैसे कल रात का काफी होमवर्क बचा हुआ है" । मैंने हंसी दबाते हुए कहा, "क्यों पूरा तो करवा दिया था । वैसे भी तुमको यह सब नहीं करना चाहिये । सेहत पर असर पढ़ता है । कोई लड़की पटा लो, आजकल की लड़कियाँ भी इस काम मैं काफी इंटेरेस्टेड रहती हैं" । "दीदी आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे लड़कियाँ मेरे लिये सलवार नीचे और कमीज ऊपर किये तैयार है कि आओ पैंट खोलकर मेरी ले लो" । "नहीं ऐसी बात नहीं है । लड़की पटानी आनी चाहिये" ।

फिर मैं उठ कर नाश्ता बनाने लगी । मन मैं सोच रही थी कि कैसे इस कुँवारे लण्ड को लड़की पटा कर चोदना सिखाऊँ? लंच टेबल पर उससे पूछा, "अच्छा यह बता तेरी किसी लड़की से दोस्ती है?"
"हाँ दीदी सुधा से" ।
"कहाँ तक"
"बस बातें करते हैं और स्कूल मैं साथ ही बैठते हैं" ।
मैंने सीधी बात करने के लिये कहा, "कभी उसकी लेने का मन करता है?"
"दीदी आप कैसी बात करती हैं" । वह शर्मा गया तो मैं बोली, "इसमे शर्माने की क्या बात है । मुट्ठी तो तो रोज मारता है । ख़्यालों मैं कभी सुधा की ली है या नहीं सच बता" । "लेकिन दीदी ख़्यालों मैं लेने से क्या होता है" । "तो इसका मतलब है कि तो उसकी असल में लेना चाहता है" । मैंने कहा ।

"उससे ज्यादा तो और एक है जिसकी मैं लेना चाहता हूँ, जो मुझे बहूत ही अच्छी लगती है" । "जिसकी कल रात ख़्यालों मैं ली थी" उसने सर हिलाकर हाँ कर दिया पर मेरे बार-बार पूछने पर भी उसने नाम नहीं बताया । इतना जरूर कहा कि उसकी चूदाई कर लेने के बाद ही उसका नाम सबसे पहले मुझे बतायेगा । मैंने ज्यादा नहीं पूछा क्योंकि मेरी चूत फ़िर से गीली होने लगी थी । मैं चाहती थी कि इससे पहले कि मेरी चूत लण्ड के लिये बेचैन हो वह खुद मेरी चूत मैं अपना लण्ड डालने के लिये गिड़गिड़ाये। मैं चाहती थी कि वह लण्ड हाथ में लेकर मेरी मिन्नत करे कि दीदी बस एक बार चोदने दो । मेरा दिमाग ठीक से काम नहीं कर रहा था इसलिये बोली, "अच्छा चल कपड़े बदल कर आ मैं भी बदलती हूँ" ।

वह अपनी यूनीफोर्म चेंज करने गया और मैंने भी प्लान के मुताबिक अपनी सलवार कमीज उतार दी । फिर ब्रा और पैंटी भी उतार दी क्योंकि पटाने के मदमस्त मौके पर ये दिक्कत करते । अपना देसी पेटीकोट और ढीला ब्लाउज़ ही ऐसे मौके पर सही रहते हैं । जब बिस्तर पर लेटो तो पेटीकोट अपने/अपनी आप आसानी से घुटने तक आ जाता है और थोड़ी कोशिश से ही और ऊपर आ जाता है । जहाँ तक ढीलें ब्लाउज़ का सवाल है तो थोड़ा सा झुको तो सारा माल छलक कर बाहर आ जाता है । बस यही सोच कर मैंने पेटीकोट और ब्लाउज़ पहना था ।

वह सिर्फ़ पायजामा और बनियान पहनकर आ गया । उसका गोरा चित्त चिकना बदन मदमस्त करने वाला लग रहा था । एकाएक मुझे एक आइडिया आया । मैं बोली, "मेरी कमर मैं थोड़ा दर्द हो रहा है जरा बाम लगा दे" । यह बेड पर लेटने का पर्फेक्ट बहाना था और मैं बिस्तर पर पेट के बल लेट गयी । मैंने पेटीकोट थोड़ा ढीला बांधा था इस लिये लेटते ही वह नीचे खिसक गया और मेरी बीच की दरार दिखाये देने लगी । लेटते ही मैंने हाथ भी ऊपर कर लिये जिससे ब्लाउज़ भी ऊपर हो गया और उसे मालिश करने के लिये ज्यादा जगह मिल गयी । वह मेरे पास बैठ कर मेरी कमर पर (आयोडेक्स पैन बाम) लगाकर धीरे धीरे मालिश करने लगा । उसका स्पर्श (तच) बड़ा ही सेक्सी था और मेरे पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी । थोड़ी देर बाद मैंने करवट लेकर अमित की और मुँह कर लिया और उसकी जान्घ पर हाथ रखकर ठीक से बैठने को कहा । करवट लेने से मेरी चूचियों ब्लाउज़ के ऊपर से आधी से ज्यादा बाहर निकाल आयी थी । उसकी जान्घ पर हाथ रखे रखे ही मैंने पहले की बात आगे बढ़ाई, "तुझे पता है कि लड़की कैसे पटाया जाता है?"

"अरे दीदी अभी तो मैं बच्चा हूँ । यह सब आप बतायेंगी तब मालूम होगा मुझे" । आयोडेक्स लगने के दौरान मेरा ब्लाउज़ ऊपर खींच गया था जिसकी वजह से मेरी गोलाइयाँ नीचे से भी झांक रही थी । मैंने देखा कि वह एकटक मेरी चूचियों को घूर रहा है । उसके कहने के अन्दाज से भी मालूम हो गया कि वह इस सिलसिले मैं ज्यादा बात करना चाह रहा है।

"अरे यार लड़की पटाने के लिये पहले ऊपर ऊपर से हाथ फेरना पड़ता है, ये मालूम करने के लिये कि वह बूरा तो नहीं मानेगी" । "पर कैसे दीदी" । उसने पूछा और अपने पैर ऊपर किये । मैंने थोड़ा खिसक कर उसके लिये जगह बनायी और कहा, "देख जब लड़की से हाथ मिलाओ तो उसको ज्यादा देर तक पकड़ कर रखो, देखो कब तक नहीं छुटाती है । और जब पीछे से उसकी आँख बन्द कर के पूछों कि मैं कौन हूँ तो अपना केला धीरे से उसके पीछे लगा दो । जब कान मैं कुछ बोलो तो अपना गाल उसके गाल पर रगड़ दो । वो अगर इन सब बातों का बूरा नहीं मानती तो आगे की सोचों" ।

अमित बड़े ध्यान से सुन रहा था । वह बोला, "दीदी सुधा तो इन सब का कोई बूरा नहीं मानती जबकि मैंने कभी ये सोच कर नहीं किया था । कभी कभी तो उसकी कमर मैं हाथ डाल देता हूँ पर वह कुछ नहीं कहती" । "तब तो यार छोकरी तैयार है और अब तो उसके साथ दूसरा खेल शुरू कर" । "कौन सा दीदी" "बातों वाला । यानी कभी उसके सन्तरो की तारीफ करके देख क्या कहती है । अगर मुस्करा कर बूरा मानती है तो समझ ले कि पटाने मैं ज्यादा देर नहीं लगेगी" ।

"पर दीदी उसके तो बहुत छोटे-छोटे सन्तरे हैं । तारीफ के काबिल तो आपके है" । वह बोला और शर्मा कर मुँह छुपा लिया । मुझे तो इसी घड़ी का इंतजार था । मैंने उसका चेहरा पकड़ कर अपनी और घूमते हुए कहा, "मैं तुझे लड़की पटाना सीखा रही हूँ और तो मुझी पर नजरें जमाये है" ।

"नहीं दीदी सच मैं आपकी चूचियों बहूत प्यारी है । बहुत दिल करता है" । और उसने मेरी कमर मैं एक हाथ डाल दिया । "अरे क्या करने को दिल करता है ये तो बता" । मैंने इठला कर पूछा ।

"इनको सहलाने का और इनका रस पीने का" । अब उसके हौसले बुलन्द हो चुके थे और उसे यकीन था कि अब मैं उसकी बात का बूरा नहीं मानूँगी । "तो कल रात बोलता । तेरी मुठ मारते हुए इनको तेरे मुँह मैं लगा देती । मेरा कुछ घिस तो नहीं जाता । चल आज जब तेरी मुठ मारूंगी तो उस वक्त अपनी मुराद पूरी कर लेना" । इतना कह उसके पायजामा मैं हाथ डालकर उसका लण्ड पकड़ लिया जो पूरी तरह से तन गया था । "अरे ये तो अभी से तैयार है" ।

तभी वह आगे को झुका और अपना चेहरा मेरे सीने मैं छुपा लिया । मैंने उसको बांहों मैं भरकर अपने करीब लिटा लिया और कस के दबा लिया । ऐसा करने से मेरी चूत उसके लण्ड पर दबने लगी । उसने भी मेरी गर्दन मैं हाथ डाल मुझे दबा लिया । तभी मुझे लगा कि वो ब्लाउज़ के ऊपर से ही मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ को चूस रहा है । मैंने उससे कहा "अरे ये क्या कर रहा है? मेरा ब्लाउज़ खराब हो जायेगा" ।

उसने झट से मेरा ब्लाउज़ ऊपर किया और निप्पल मुँह मैं लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं उसकी हिम्मत की दाद दिये बगैर नहीं रह सकी । वह मेरे साथ पूरी तरह से आजाद हो गया था । अब यह मेरे ऊपर था कि मैं उसको कितनी आजादी देती हूँ । अगर मैं उसे आगे कुछ करने देती तो इसका मतलब था कि मैं ज्यादा बेकरार हूँ चुदवाने के लिये और अगर उसे मना करती तो उसका मूड़ खराब हो जाता और शायद फ़िर वह मुझसे बात भी ना करे । इस लिये मैंने बीच का रास्ता लिया और बनावटी गुस्से से बोली, "अरे ये क्या तो तो जबरदस्ती करने लगा । तुझे शर्म नहीं आती" ।

"ओह्ह दीदी आपने तो कहा था कि मेरा ब्लाउज़ मत खराब कर । रस पीने को तो मना नहीं किया था इसलिये मैंने ब्लाउज़ को ऊपर उठा दिया" । उसकी नज़र मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ पर ही थी जो कि ब्लाउज़ से बाहर थी । वह अपने को और नहीं रोक सका और फ़िर से मेरी चूचींयाँ को मुँह मैं ले ली और चूसने लगा । मुझे भी मज़ा आ रहा था और मेरी प्यास बढ़ रही थी । कुछ देर बाद मैंने जबरदस्ती उसका मुँह लेफ़्ट चूचींयाँ से हटाया और राइट चूचींयाँ की तरफ़ लेते हुए बोली, "अरे साले ये दो होती हैं और दोनों मैं बराबर का मज़ा होता है" ।

उसने राइट मम्मे को भी ब्लाउज़ से बाहर किया और उसका निप्पल मुँह मैं लेकर चुभलाने लगा और साथ ही एक हाथ से वह मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ को सहलाने लगा । कुछ देर बाद मेरा मन उसके गुलाबी होंठों को चूमने को करने लगा तो मैंने उससे कहा, "कभी किसी को किस किया है?" "नहीं दीदी पर सुना है कि इसमें बहूत मज़ा आता है" । "बिल्कुल ठीक सुना है पर किस ठीक से करना आना चाहिये" ।

"कैसे"

उसने पूछा और मेरी चूचींयाँ से मुँह हटा लिया । अब मेरी दोनों चूचियों ब्लाउज़ से आजाद खुली हवा मैं तनी थी लेकिन मैंने उन्हे छिपाया नहीं बल्कि अपना मुँह उसकेउसकी मुँह के पास लेजा कर अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिये फ़िर धीरे से अपने होंठ से उसके होंठ खोलकर उन्हे प्यार से चूसने लगी । करीब दो मिनट तक उसके होंठ चूसती रही फ़िर बोली ।

"ऐसे" ।

वह बहूत एक्साइटिड हो गया था । इससे पहले कि मैं उसे बोलूँ कि वह भी एक बार किस करने की प्रक्टीस कर ले, वह खुद ही बोला, "दीदी मैं भी करूं आपको एक बार" "कर ले" । मैंने मुस्कराते हुए कहा ।

अमित ने मेरी ही स्टाइल मैं मुझे किस किया । मेरे होंठों को चूसते समय उसका सीना मेरे सीने पर आकर दबाव डाल रहा था जिससे मेरी मस्ती दो गुणी हो गयी थी । उसका किस खत्म करने के बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया और बांहों मैं लेकर फ़िर से उसके होंठ चूसने लगी । इस बार मैं थोड़ा ज्यादा जोश से उसे चूस रही थी । उसने मेरी एक चूचींयाँ पकड़ ली थी और उसे कस कसकर दबा रहा था । मैंने अपनी कमर आगे करके चूत उसके लण्ड पर दबायी । लण्ड तो एकदम तन कर आयरन रोड हो गया था । चुदवाने का एकदम सही मौका था पर मैं चाहती थी कि वह मुझसे चोदने के लिये भीख माँगें और मैं उस पर एहसान करके उसे चोदने की इजाजत दूँ ।

मैं बोली, "चल अब बहूत हो गया, ला अब तेरी मुठ मार दूँ" । "दीदी एक रिक्वेस्ट करूँ" "क्या" मैंने पूछा । "लेकिन रिक्वेस्ट ऐसी होनी चाहिये कि मुझे बुरा ना लगे" ।

ऐसा लग रहा था कि वह मेरी बात ही नहीं सुन रहा है बस अपनी कहे जा रहा है । वह बोला, "दीदी मैंने सुना है कि अन्दर डालने मैं बहूत मज़ा आता है । डालने वाले को भी और डलवाने वाले को भी । मैं भी एक बार अन्दर डालना चाहता हूँ" ।

"नहीं अमित तुम मेरे छोटे भाई हो और मैं तुम्हारी बड़ी बहन" । "दीदी मैं आपकी लूँगा नहीं बस अन्दर डालने दीजिये" । "अरे यार तो फ़िर लेने मैं क्या बचा" । "दीदी बस अन्दर डालकर देखूँगा कि कैसा लगता है, चोदूंगा नहीं प्लीज़ दीदी" ।

मैंने उस पर एहसान करते हुए कहा, "तुम मेरे भाई हो इसलिये मैं तुम्हारी बात को मना नहीं कर सकती पर मेरी एक सर्त है । तुमको बताना होगा कि अकसर ख़्यालों मैं किसकी चोदते हो?" और मैं बेड पर पैर फैला कर चित लेट गयी और उसे घुटने के बल अपने ऊपर बैठने को कहा । वह बैठा तो उसके पायजामा के ज़र्बन्द को खोलकर पायजामा नीचे कर दिया । उसका लण्ड तन कर खड़ा था । मैंने उसकी बांह पकड़ कर उसे अपने ऊपर कोहनी के बल लिटा लिया जिससे उसका पूरा वज़न उसके घुटने और कोहनी पर आ गया । वह अब और नहीं रूक सकता था । उसने मेरी एक चूचींयाँ को मुँह मैं भर लिया जो की ब्लाउज़ से बाहर थी । मैं उसे अभी और छेड़ना चाहती थी । सुन अमित ब्लाउज़ ऊपर होने से चुभ रहा है । ऐसा कर इसको नीचे करके मेरे सन्तरे धाप दे" । "नहीं दीदी मैं इसे खोल देता हूँ" । और उसने ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। अब मेरी दोनों चुचियां पूरी नंगी थी । उसने लपक कर दोनों को कब्जे मैं कर लिया । अब एक चूचींयाँ उसके मुँह मैं थी और दूसरी को वह मसल रहा था । वह मेरी चूचियों का मज़ा लेने लगा और मैंने अपना पेटीकोट ऊपर करके उसके लण्ड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया । कुछ देर बाद लण्ड को चूत के मुँह पर रखकर बोली, "ले अब तेरे चाकू को अपने ख़रबूज़े पर रख दिया है पर अन्दर आने से पहले उसका नाम बता जिसकी तो बहूत दिन से चोदना चाहता है और जिसे याद करके मुठ मारता है" ।

वह मेरी चूचियों को पकड़ कर मेरे ऊपर झुक गया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिये । मैं भी अपना मुँह खोलकर उसके होंठ चूसने लगी । कुछ देर बाद मैंने कहा, "हाँ तो मेरे प्यारे भाई अब बता तेरे सपनों की रानी कौन है" ।

"दीदी आप बुरा मत मानियेगा पर मैंने आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख़्यालों मैं रखकर" ।

"हाय भय्या तो कितना बेशर्म है । अपनी बड़ी बहन के बारे मैं ऐसा सोचता था" । "ओह्ह दीदी मैं क्या करूं आप बहूत खूबसूरत और सेक्सी है । मैं तो कब से आपकी चूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चूत मैं लण्ड डालना चाहता था । आज दिल की आरजू पूरी हुयी" । और फ़िर उसने शर्मा कर आंखे बन्द करके धीरे से अपना लण्ड मेरी चूत मैं डाला और वादे के मुताबिक चुपचाप लेट गया ।

"अरे तो मुझे इतना चाहता है । मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि घर मैं ही एक लण्ड मेरे लिये तड़प रहा है । पहले बोला होता तो पहले ही तुझे मौका दे देती" । और मैंने धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलानी शुरू कर दी । बीच-बीच मैं उसकी गाँड भी दबा देती ।

"दीदी मेरी किस्मत देखिये कितनी झान्टू है । जिस चूत के लिये तड़प रहा था उसी चूत में लण्ड पड़ा है पर चोद नहीं सकता । पर फ़िर भी लग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ" । वह खुल कर लण्ड चूत बोल रहा था पर मैंने बूरा नहीं माना । "अच्छा दीदी अब वादे के मुताबिक बाहर निकालता हूँ" । और वह लण्ड बाहर निकालने को तैयार हुआ ।

मैं तो सोच रही थी कि वह अब चूत मैं लण्ड का धक्का लगाना शुरू करेगा लेकिन यह तो ठीक उलटा कर रहा था । मुझे उस पर बड़ी दया आयी । साथ ही अच्छा भी लगा कि वादे का पक्का है । अब मेरा फ़र्ज़ बनता था कि मैं उसकी वफादारी का इनाम अपनी चूत चुदवाकर दूँ । इस लिये उससे बोली, "अरे यार तूने मेरी चूत की अपने ख़्यालों में इतनी पूजा की है । और तुमने अपना वादा भी निभाया इसलिये मैं अपने प्यारे भाई का दिल नहीं तोड़ूँगी । चल अगर तो अपनी बहन को चोद्कर बहनचोद बनना ही चाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चूत" ।

मैंने जान कर इतने गन्दे वर्ड्स उसे कहे थे पर वह बूरा ना मान कर खुश होता हुआ बोला, "सच दीदी" । और फ़ौरन मेरी चूत मैं अपना लण्ड धका धक पेलने लगा कि कहीं मैं अपना इरादा ना बदल दूँ ।

"तू बहुत किस्मत वाला है अमित" । मैं उसके कुँवारे लण्ड की चूदाई का मज़ा लेते हुए बोली । क्यों दीदी" "अरे यार तू अपनी जिन्दगी की पहली चूदाई अपनी ही बहन की कर रहा है । और उसी बहन की जिसकी तू जाने कबसे चोदना चाहता था" ।

"हाँ दीदी मुझे तो अब भी यकीन नहीं आ रहा है, लगता है सपने में चोद रहा हूँ जैसे रोज आपको चोदता था" । फिर वह मेरी एक चूचींयाँ को मुँह मैं दबा कर चूसने लगा । उसके धक्कों की रफ्तार अभी भी कम नहीं हुयी थी । मैं भी काफी दिनों के बाद चुद रही थी इसलिये मैं भी चूदाई का पूरा मज़ा ले रही थी ।

वह एक पल रुका फ़िर लण्ड को गहराई तक ठीक से पेलकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा । वह अब झड़ने वाला था । मैं भी सातवें आसमान पर पहूँच गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठा कर उसके धक्कों का जवाब दे रही थी । उसने मेरी चूचींयाँ छोड़ कर मेरे होंठों को मुँह मैं ले लिया जो कि मुझे हमेशा अच्छा लगता था । मुझे चूमते हुई कस कस कर दो चार धक्के दिये और और "हाय आशा मेरी जान" कहते हुए झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया । मैंने भी नीचे से दो चार धक्के दिये और "हाय मेरे राजा कहते हुए झड़ गयी ।

चुदाई के जोश ने हम दोनों को निढाल कर दिया था । हम दोनों कुछ देर तक यूँ ही एक दूसरे से चिपके रहे । कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा, "क्यों मज़ा आया मेरे बहनचोद भाई को अपनी बहन की चूत चोदने में" उसका लण्ड अभी भी मेरी चूत में था । उसने मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ कर अपने लण्ड को मेरी चूत पर कसकर दबाया और बोला, "बहुत मजा आया दीदी । यकीन नहीं होता कि मैंने अपनी बहन को चोदा है और बहनचोद बन गया हूँ" । "तो क्या मैंने तेरी मुठ मारी है" "नहीं दीदी यह बात नहीं है" । "तो क्या तुझे अब अफसोस लग रहा है अपनी बहन को चोद्कर बहनचोद बनने का" ।

"नहीं दीदी ये बात भी नहीं है । मुझे तो बड़ा ही मज़ा आया बहनचोद बनने मैं । मन तो कर रह कि बस अब सिर्फ़ अपनी दीदी की जवानी का रा ही पीता रहूं । हाय दीदी बल्कि मैं तो सोच रहा हूँ कि भगवान ने मुझे सिर्फ़ एक बहन क्यों दी । अगर एक दो और होती तो सबको चोदता । दीदी मैं तो यह सोच रहा हूँ कि यह कैसे चूदाई हुयी कि पूरी तरह से चोद लिया लेकिन चूत देखी भी नहीं" ।

"कोई बात नहीं मज़ा तो पूरा लिया ना?" "हाँ दीदी मज़ा तो खूब आया" । "तो घबराता क्यों है? अब तो तूने अपनी बहन चोद ही ली है । अब सब कुछ तुझे दिखाऊंगी । जब तक माँ नहीं आती मैं घर पर नंगी ही रहूँगी और तुझे अपनी चूत भी चटवाऊँगी और तेरा लण्ड भी चूसूँगी । बहुत मज़ा आता है" । "सच दीदी" "हाँ । अच्छा एक बात है तो इस बात का अफसोस ना कर कि तेरे सिर्फ़ एक ही बहन है, मैं तेरे लिये और चूत का जुगाड़ कर दूंगी" ।

"नहीं दीदी अपनी बहन को चोदने मैं मज़ा ही अनोखा है । बाहर क्या मज़ा आयेगा" "अच्छा चल एक काम कर तो माँ को चोद ले और मादरचोद भी बन जा" । "ओह दीदी ये कैसे होगा"

"घबरा मत पूरा इन्तज़ाम मैं कर दूंगी । माँ अभी ३८ साल की है, तुझे मादरचोद बनने मैं भी बड़ा मज़ा आयेगा" ।

"हाय दीदी आप कितनी अच्छी हैं । दीदी एक बार अभी और चोदने दो इस बार पूरी नंगी करके चोदूंगा" । "जी नहीं आप मुझे अब माफ़ करिये" । "दीदी प्लीज़ सिर्फ़ एक बार" । और लण्ड को चूत पर दबा दिया ।

"सिर्फ एक बार" । मैंने ज़ोर देकर पूछा । "सिर्फ एक बार दीदी पक्का वादा" ।

"सिर्फ एक बार करना है तो बिलकुल नहीं" । "क्यों दीदी" अब तक उसका लण्ड मेरी चूत मैं अपना पूरा रस निचोड़ कर बाहर आ गया था । मैंने उसे झटके देते हुए कहा, "अगर एक बार बोलूँगी तब तुम अभी ही मुझे एक बार और चोद लोगे" "हाँ दीदी" ।

"ठीक है बाकी दिन क्या होगा । बस मेरी देखकर मुठ मारा करेगा क्या । और मैं क्या बाहर से कोई लाऊंगी अपने लिये । अगर सिर्फ़ एक बार मेरी लेनी है तो बिलकुल नहीं" ।

उसे कुछ देर बाद जब मेरी बात समझ मैं आयी तो उसके लण्ड में थोड़ी जान आयी और उसे मेरी चूत पड़ा रगड़ते हुए बोला, "ओह दीदी यू र ग्रेट" ।

Sunday, November 26, 2006

A Ghazal


जबसे लन्ड ने चूत को निशाना बना रक्खा है,
चूत ने भी लबों को अपने खोल रक्खा है।

टट्टो तुम चूत को पीटते क्यों हो,
तुम को किसने अन्दर जाने से रोक रक्खा है।

लन्ड के खौफ़ से चूत सहमी रहती थी पहले,
अब तो उस ने चुदाई का मज़ा चख रक्खा है।

चूत हर वक्त लन्ड को खुश आमदीद कहे,
लन्ड के रास्ते में उस ने छिड़काव कर रक्खा है।

चूत को लन्ड से मुहब्बत हो गयी कुछ ऐसी,
रात दिन उस ने दर अपना खुला छोड़ रक्खा है।

चूत लन्ड को नहला धुला कर बाहर भेजे,
लगता है उसने अन्दर हमाम बना रक्खा है।

चूत भी क्या चीज़ है, खट्टी भी तुर्श भी,
फिर भी उसके जूस में कितना मज़ा रक्खा है।

सब कोई लड़ाई झगड़े से नफ़रत है लेकिन,
चूत ने लन्ड के लिये मैदान बना रक्खा है।

लन्ड अन्दर जाये तो चूत, खिल खिल जाती है,
एक एक धक्के पर लन्ड के, चूत हिल हिल जाती है,
ऐसे मिलें जैसे ताल से ताल मिल जाती है,
इसी झटके इसी धक्के में तो मज़ा रक्खा है॥

Story of Pappi


मेरे पड़ोस मैं पप्पी रहती थी। वो ११ मैं पढ़ रही थी। उसकी उमर १८ साल थी, पप्पी बहूत सेक्सी थी। उसके बूब्स मुझे बहूत अच्छे लगते थे।। वो एकदम हरी-भरी थी। मेरी उसके घरवालो के साथ ओर उसके साथ अच्छी रेगुलर बातें होती रहती थी, क्योंकि उसकी और हमारी छत (टेरस) एक ही थी, बीच मैं सिर्फ़ ३’ की एक दीवार थी। वो स्टडी मे कमजोर थी, उसके एग्जाम आने वाले थे, उसकी मुम्मी ने मुझसे कहा कि परेश, पप्पी के एग्जाम शुरू होने वाले हैं, वो स्टडी में कमजोर हैं, उसे थोड़ा टाइम निकाल कर पढ़ा दिया करो। मैंने हां कर दी, मैं रोज रात को ८ बजे उसके घर उसे पढ़ाने जाता। मेरा रूम फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, उसका भी एक रूम फ़र्स्ट फ़्लोर पर था, वो बन्द रहता था क्योंकि उसके मम्मी, पापा और उसका छोटा भाई जो १२ साल का था सब ग्राउंड फ़्लोर पर ही रहते थे। दो दिन के बाद मैंने उसकी मम्मी से कहा, "भाभी नीचे हम डिस्टर्ब होते हैं, क्या हम आपके ऊपर वाले रूम मैं पढ़ाई कर सकते हैं?"

उन्होने तुरन्त हां कर दी। मैं रोज़ रात को ८ बजे जाता और रात के ११-१२ बजे तक वहाँ पर रुकता था। वो पढ़ाई मे बहूत कमजोर थी। उसे अच्छे से कुछ भी याद नहीं होता था, मैंने उसकी मम्मी से कहा तो उन्होने बोला कि अगर नहीं पढ़ती है तो पिटाई कर दिया करो, तो मैंने एक दिन उसे उसकी मम्मी के सामने ही हलका सा एक थप्पड़ मारा, उस दिन मैंने उसे पहली बार टच किया था, उसका गाल एकदम गरम था, थप्पड़ खा कर वो मुस्कराने लगी। अगले दिन उसने जींस और शर्ट जिसके बटन सामने खुलते थे पहने हुए थी, मैं उसके सामने बैठा कर उसे मैथ्स समझा रहा था, उसके शर्ट का एक बटन टूटा हुआ था, उसका ध्यान पढ़ाई मे था और मेरा ध्यान उसके टूटे हुए बटन मे उसके बूब्स पर था, उसकी काली ब्रा और व्हाइट बूब्स मेरे सामने दिख रहे थे। अचानक उसका ध्यान अपने टूटे हुए बटन पर गया तो वो शर्माइ और नीचे जा कर शर्ट चेन्ज कर के आई। मैंने पूछा क्या हुआ तो उसने बोला आप मुझे अच्छे से पढ़ा नहीं पा रहे थे।

अगले दिन उसने टाइट टी शर्ट पहनी हुई थी जिसमे उसके बूब्स का उभार गजब ढा रहा था, मेरा ध्यान वहीं पर था, उसने पूछा, "परेश, क्या हुआ तुम्हारा ध्यान कहाँ हैं?" मैंने कहा, "मेरा ध्यान तुझमे हैं"। वो शरमाई और बोली धत, मेरी हिम्मत बढ़ गयी। मैंने हलके से उसके गाल पर चपत लगाया और प्यार से मुस्कराया। जवाब मे वो भी मुस्कराई। मेरी हिम्मत और बढ़ी मैंने उसके दोनो गालो को पकड़ कर उसके होठों को चूम लिया, उसने दूर हटाते हुए कहा मम्मी आ जायेगी और हम वापस पढ़ाई मे लग गये।

अगले दिन उसके मम्मी, पापा और उसका भाई किसी काम से बाहर गये थे, जाते समय उसकी मम्मी ने मुझसे कहा कि पप्पी घर पर अकेली है तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना, मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद मिल गयी। रात को ८ बजे मैं उसके घर गया। वो ग्राउन्ड फ़्लोर पर थी आज उसने सुन्दर सी ब्लैक कलर की नाइटी पहन रखी थी, हम दो घण्टे तक पढ़ते रहे। बाद मे वो अपने रूम मे जाकर सो गयी मैं बाहर हाल मैं सो गया, अचानक वहाँ लाइट चली गयी। वो रूम से बाहर आई और मेरे पास हाल मे बेड पर बैठ गयी और हम बातें करने लगे, उसने मुझसे कहा "परेश, आइ लव यू"। मैंने कुछ नहीं बोला और उसे अपनी बाहों मे ले लिया वो चुप रही उसने कुछ भी नहीं बोला, मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया, वो हलका सा विरोध करती रही इतने मे लाइट आ गयी तो मैंने देख उसका चेहर एकदम लाल हो रहा है और आँखे अपने आप बन्द हो रही हैं, मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ फिराया तो वो एक दम से मुझसे चिपक गयी।, मैं उसके रसीले होठों को चूमता रहा और हाथो से धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाता रहा, वो मदहोश हो गयी।

मैं थोड़ा आगे बढ़ा और मैंने उसकी नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो मेरे सामने पिन्क ब्रा और पैन्टी मे थी, उसकी फ़िगर देख कर मैं अपने होश खो गया। मैंने उसके पूरे बदन को चूमना शुरू कर दिया। वो भी मुझे चूमने लगी और मेरे कपड़े उतारने लगी। अब मैं भी सिर्फ़ अन्डरविअर मे था, मैं उसे चूमता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ घूमाता रहा, वो उसके निप्पल क्या पत्थर की तरह कड़क थे, मैंने अपने हाथ उसके पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, एक झटके से ब्रा उसके हाथ मे आ गयी, और उसके बूब्स आज़ाद हो गये, इस समय के पहले भी मैंने ३-४ बार सेक्स किया था लेकिन उसका हुस्न देख कर मैं अपने होश खो गया, और धीरे से मैंने उसकी चड्डी भी उतार दी। बदले मे उसने भी मेरी चड्डी उतार दी।

अब हम दोनो नन्गे थे। हम दोनो एक दूसरे को चाटते रहे। मैंने अपना मुँह उसके निप्पल पर लगाया और उसको चूसने लगा उसने मेरे लण्ड को हाथ मे ले लिया और उसको सहलाने लगी। मेरा लण्ड लोहे की तरह एक दम कड़क हो गया, मैंने धीरे से अपने लण्ड को उसके मुँह के पास किया तो वो उसे चूमने लगी। मैंने उसे मुँह मैं लेने को कहा तो वो उसे मुँह मैं लेकर चूसने लगी। मेरा बड़ा बुरा हाल हो रहा था, मैंने अपनी उँगली धीरे से उसकी चूत मे डाल दी, उसकी चूत गरम तवे की तरह तप रही थी। मेरी उँगलियां उसकी चूत की गरमी महसूस कर रही थी।

वो मेरे लण्ड को चूसती रही और मेरी उँगलियां उसकी चूत के साथ खेलती रही। अब वो चुदवाने के लिये एक दम तैयार थी, उसकी चूत मेरी उँगलियों की हरकत से पानी से भर गयी और गीली हो गयी, मैं अपना मुँह उसकी चूत पर ले गया और उसकी जाँघों और उसकी चूत को चूमने लगा। वो जोर जोर से पाँव हिलाने लगी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत मैं डाल दी और उसके पानी को पीने लगा। वो एक दम मदहोश हो गयी और मेरे लण्ड को दाँत चुभाते हुये और जोर से चूसने लगी। थोड़ी देर मे उसकी चूत ने और पानी छोड़ दिया। मैं उसे पीता रहा। कुँवारी चूत का पानी पीने का मेरा यह पहला मौका था, और उसके मुँह मे मेरे लण्ड ने भी ढेर सारा पानी छोड़ दिया जो सीधे उसके गले मे गया, उसने बड़े प्यार से मेरा पूरा पानी पी लिया और एक भी बून्द बाहर नहीं गिरने दी, और मेरे लण्ड को चुसना जारी रखा ३-४ मिनट मे मेरा लण्ड वापस तन गया। उसकी हरकतो से मुझे लगने लगा कि वो चूदाइ के लिये बहूत आतुर है।

मैंने उसे बेड पर सीधा लिटाया और उसकी गाँड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे उसकी चूत ऊपर आ गयी, मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत पर फिराने लगा। उसकी चूत तन्दूर की तरह गरम थी, उसने कहा कि उसने कभी चुदवाया नहीं है। मेरा इतना मोटा लण्ड उसकी चूत मैं कैसे जायेगा, मैंने कहा थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद मे मज़ा आयेगा। मैंने अपने लण्ड और उसकी चूत पर क्रीम लगायी और अपना लण्ड धीरे से उसकी चूत मे घुसाने लगा। उसकी चूत बहूत टाइट थी। मेरे लण्ड का सुपाड़ा उसके अन्दर जाते ही वो जोर से बोली, "बहूत दर्द हो रहा है"। मैं वहीं पर रूक गया और उसकी चूचीयों को सहलाने लगा और उसके होठों को चूमने लगा। थोड़ी देर मे पप्पी जोश मे आ गयी और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने ऊपर से थोड़ा जोर लगाया, मेरा लण्ड उसकी चूत मैं ३ इन्च घुस गया वो जोर से चिल्लाने लगी और पसीने मे नहा गयी। मुझसे कहने लगी, "प्लीज! बाहर निकालो"।

मैंने उससे बोला कि पहली बार मे थोड़ा दर्द होता है और उसे चूमने लगा। कुछ देर बाद वो शान्त हो गयी। मैंने उससे बोला कि अपना मुँह बन्द रखना। मैं अभी अपना पूरा लण्ड तेरी चूत मे डालुंगा। उसने जोश मे आकर कहा अगर मैं चीँखू भी तो भी तुम नहीं रुकना। मैं धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत मैं ३ इन्च मे अन्दर बाहर करने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा, और वो मुझसे ज्यादा चिपकने लगी। अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 7 इन्च का लण्ड उसकी चूत मे घूसेड़ दिया। वो बहूत जोर से चींखी और जोर से तड़पने लगी। मैं वहीं पर रूक गया। उसकी चूत मैं से खून निकलने लगा था। वो जोर जोर से रोने लगी, मैंने उसे प्यार से समझाया कि मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत मैं चल गया है। अभी थोड़ा सा दर्द होगा लेकिन बाद मे जो मज़ा आयेगा वो पूरा दर्द भुला देगा। मैंने उसके लाख कहने पर भी अपना लण्ड उसकी चूत से नहीं निकाला।

पाँच मिनट तक मैं सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फ़िराते रहा। धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और उसे जोश आने लगा। वो मुझसे चिपक गयी और अपने चूतड़ उठाने लगी। उसकी चूत मेरे लण्ड को कभी जकड़ती और कभी ढीला छोड़ती। मैं इशारा समझ गया और मैंने धीरे धीरे अपने लण्ड को उसकी चूत मैं अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर मैं उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाइ का मज़ा लेने लगी। १० मिनट तक मैं उसे चोदता रहा। इतनी देर मे उसकी चूत गीली हो गयी और उसका दर्द कम हो गया, और वो बहूत मज़े लेकर चुदवाने लगी। करीब १५ मिनट के बाद मैंने उसे कहा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने उसे टाइट पकड़ा, जिससे उसके मुंह से आवाज न निकले उसके होठ अपने होठो में मजबूती से दबा लिये और सरपट घोड़ा दौड़ा दिया। मैं पूरे जोश मे आ चुका था और मैं अपना लण्ड पूरा बाहर निकाल कर एक धक्के से पूरा घूसा देता, पूरी फूर्ती से। अब वो बुरी तरह छूटने के लिये दम लगा रही थी और मैं उसे उतना ही मजबूती से पकड़ रहा था। झटके पर झटके। धक्के पर धक्के। एक दो मिनट में उसकी चूत बुरी तरह से मेरे लण्ड को रोकने की कोशिश कर रही थी। और मुझे साफ़ पता चला जैसे कि उसकी चूत ने एक जोर से पिच्कारी मेरे लण्ड पर छोड़ दी। अब मैंने रफ़्तार और धक्के की ताकत बढ़ा दी और बड़े दम लगाने पर मैं भी चरम आनन्द पर पहूँच गया। ऐसा लगा जैसे मेरे लण्ड से कोई टँकी खुल गयी हो और मैंने बहुत सारा पानी उसकी चूत मैं भर दिया। करीब १० मिनट तक उसके ऊपर लेटा रहा। हम दोनो की सांस की आवाज से पूरा कमरा गूँज रहा था।

उसके बद हम दोनो उथे और बाथरूम मे जाकर उसकी चूत और मेरे लण्ड को धो कर साफ़ किया और वापस आकर बेड पर बैठ गये, मेरा लण्ड इतनी देर मे वापस तन कर खड़ा हो गया। उसे तना देखकर वो बोली अब नहीं परेश, अभी दो घण्टे सो लेते हैं। उसके बाद करेंगे। मैंने कहा ठीक है। हमने अपने कपड़े पहन लिये और अपना सोने लगे। लेकिन आंखो में नींद कहां। करीब एक घण्टे बाद मैने उसके और अपने कपड़े फिर उतार दिये। उसने कहा कि प्यार से करना क्योंकि अभी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है। मैंने उसके बदन को दबाना शुरू कर दिया, बच्चो कि तरह उसका दूध पीने लगा तो वह कसमसा उठी। और उसने भी मुझे चूमना शूरू कर दिया और खुद-ब-खुद 6-9 की पोजीशन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं उसकी चूत को। फिर मैं काम शास्त्र में बताये एक एक आसन से उसे चोदने लगा और एक ही रात में कली को खिला कर फ़ूल बना दिया।

फिर तो हम दोनो को जब भी मौका मिलता वो मुझसे चुदवाती थी, करीब एक साल तक मैं उसे चोदता रहा, उसके बाद उसके पापा की बदली हो गयी। उसके बाद से आज तक उससे मेरी मुलाकात नहीं हुई है। वो मेरे जीवन सबसे हसीन कली थी जिसे फूल बनाने का जिम्मा खुदा ने मुझे इनाम मे दिया था।

Sunday, September 17, 2006

Hi

I am Kaam Dev and Hindi meaning of my name is the Lord of Love Making. I am a sincere student of art of sex. I believe that performing sex is divine, it is one of the best blessings of the GOD, it leads to ultimate goal of human life, 'MOKSHA'. Studying & experimenting with new positions of lave making is my only passion.

Cheers

Kaam Dev